कृपेन्द्र तिवारी

Saturday, April 25, 2020

आज देश में तथाकथित "संविधान के रक्षक" की गुटबाज़ी की नीति इतनी शक्तिशाली हो गई है,जिससे बड़े बड़े महारथी भी लोहा लेने से डरते है। और यह लोहा ना लेना सामान्य जनमानस की चुप्पी है। यह चुप्पी इस स्तर पर है, कि सत्ता पक्ष(केंद्रीय) भी इनसे तौबा करना ही अपनी भलमनसाहत समझती है। 

इन ऊंचे ओहदे पर बैठे लोगों के द्वारा अपनी विचारधारा के अनुकूल एक एजेंडा निर्धारित किया जाता है, जिसे फिर सामाजिक अंतर्जाल(सोशल साइट) के माध्यम से प्रसारित किया जाता है। और इस एजेंडा के वाहक होते है हमारे ही अपने बीच के "तथाकथित धर्मनिरपेक्ष" लोग.........

सामान्यतः देश में घटनाएं होती रहती है, उस पर देश के मानस अपनी चेतना की सामर्थ्यता के अनुसार अपना पक्ष रखता है,जो कि चर्चा का विषय रहता है,और इसी चर्चा के विषय को अपने पक्ष में रखने के लिए "संविधान के रक्षक" और "तथाकथित धर्मनिरपेक्ष" लोग एजेंडा निर्धारित करते है। और इसे पूरे जोरों शोरों से,एक मजबूत लॉबी के माध्यम से देश के सम्मुख पेश किया जाता है।

इस विषय पर स्वयं के अंतर्मन कि व्यथा को पेश करने का विचार मन में तब आया,जब पालघर में साधुओं कि जघन्य और निर्ममता पूर्ण हत्या पर उपर्युक्त वर्णित लॉबी के द्वारा मौन साधना तथा उसे चोर घोषित किया जाने लगा।

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