इन ऊंचे ओहदे पर बैठे लोगों के द्वारा अपनी विचारधारा के अनुकूल एक एजेंडा निर्धारित किया जाता है, जिसे फिर सामाजिक अंतर्जाल(सोशल साइट) के माध्यम से प्रसारित किया जाता है। और इस एजेंडा के वाहक होते है हमारे ही अपने बीच के "तथाकथित धर्मनिरपेक्ष" लोग.........
सामान्यतः देश में घटनाएं होती रहती है, उस पर देश के मानस अपनी चेतना की सामर्थ्यता के अनुसार अपना पक्ष रखता है,जो कि चर्चा का विषय रहता है,और इसी चर्चा के विषय को अपने पक्ष में रखने के लिए "संविधान के रक्षक" और "तथाकथित धर्मनिरपेक्ष" लोग एजेंडा निर्धारित करते है। और इसे पूरे जोरों शोरों से,एक मजबूत लॉबी के माध्यम से देश के सम्मुख पेश किया जाता है।
इस विषय पर स्वयं के अंतर्मन कि व्यथा को पेश करने का विचार मन में तब आया,जब पालघर में साधुओं कि जघन्य और निर्ममता पूर्ण हत्या पर उपर्युक्त वर्णित लॉबी के द्वारा मौन साधना तथा उसे चोर घोषित किया जाने लगा।
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