Saturday, April 25, 2020

आज देश में तथाकथित "संविधान के रक्षक" की गुटबाज़ी की नीति इतनी शक्तिशाली हो गई है,जिससे बड़े बड़े महारथी भी लोहा लेने से डरते है। और यह लोहा ना लेना सामान्य जनमानस की चुप्पी है। यह चुप्पी इस स्तर पर है, कि सत्ता पक्ष(केंद्रीय) भी इनसे तौबा करना ही अपनी भलमनसाहत समझती है। 

इन ऊंचे ओहदे पर बैठे लोगों के द्वारा अपनी विचारधारा के अनुकूल एक एजेंडा निर्धारित किया जाता है, जिसे फिर सामाजिक अंतर्जाल(सोशल साइट) के माध्यम से प्रसारित किया जाता है। और इस एजेंडा के वाहक होते है हमारे ही अपने बीच के "तथाकथित धर्मनिरपेक्ष" लोग.........

सामान्यतः देश में घटनाएं होती रहती है, उस पर देश के मानस अपनी चेतना की सामर्थ्यता के अनुसार अपना पक्ष रखता है,जो कि चर्चा का विषय रहता है,और इसी चर्चा के विषय को अपने पक्ष में रखने के लिए "संविधान के रक्षक" और "तथाकथित धर्मनिरपेक्ष" लोग एजेंडा निर्धारित करते है। और इसे पूरे जोरों शोरों से,एक मजबूत लॉबी के माध्यम से देश के सम्मुख पेश किया जाता है।

इस विषय पर स्वयं के अंतर्मन कि व्यथा को पेश करने का विचार मन में तब आया,जब पालघर में साधुओं कि जघन्य और निर्ममता पूर्ण हत्या पर उपर्युक्त वर्णित लॉबी के द्वारा मौन साधना तथा उसे चोर घोषित किया जाने लगा।

अनिश्चितताओं का खेल क्रिकेट:-ICC के पास निर्णय क्षमता का अभाव

                     क्रिकेट के मक्का लार्ड्स के मैदान में हो रहे,क्रिकेट विश्वकप मैच २०१९ के फाइनल मैच को देखकर शायद ही कोई ऐसा बंदा रहा होगा,जिसका रोम-रोम रोमांचित न हुआ हो।वास्तव में यह मैच विश्वकप के अंतिम मुकाबले होने की सार्थकता की भूमिका बखूबी निभा रहा था।।

                     प्रारंभिक स्थिति में तो मैच के प्रथम पारी के रन को देखकर इंग्लैंड का पड़ला भारी लगने लगा,फिर प्रक्रिया-दर-प्रक्रिया मैच के दूसरी पारी में जो अनिश्चितता का दौर प्रारंभ हुआ वो थमने का नाम ही नहीं लिया और अंतिम दौर तक बरकरार रहा।ये अनिश्चितता 50 ओवर के पूरा होने के बाद भी बन रहा।निर्णायक स्थिति प्राप्त ना होने पर अंततः सुपर ओवर से मैच का निर्णय लेने का फैसला किया गया।।

                      दोनों देश के खिलाड़ियों का जज्बा ऐसा रहा, कि दोनों ही अपने-अपने देश को विश्वकप दिलाने हेतु प्रतिबद्ध होकर प्रदर्शन किए। करे भी क्यों ना,क्योंकि इंग्लैंड को 3 बार 1975,1979,1992 के फाइनल पहुंच कर हार का सामना करना पड़ा था,वहीं न्यूजीलैंड का ये हृदय की ज्वाला कोई पुराना नहीं था,पिछले वर्ल्ड कप 2015 में ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार हुई थी,दोनों का ही सपना,कि अपने देश को पहला विश्वकप दिलाना है।।

                      सुपर ओवर में इंग्लैंड ने उम्दा प्रदर्शन करते हुए एक ओवर में 2 बाउंड्री के सहयोग से 15 रन बना कर न्यूजीलैंड को 16 रन का लक्ष्य दिया,न्यूजीलैंड ने भी लक्ष्य का पीछा करते हुए एक बाउंड्री(छक्का) की मदद से 15 रन ही बतौर पाई।।

                     वास्तव में यदि क्रिकेट के नियमो से अनभिज्ञ व्यक्ति वहां बैठा हो तो उसके लिए पुन वहीं स्थिति निर्मित हो गई जो मैच के 50 ओवर के समाप्ति होने पर हुआ था उसके  अनुसार सुपर ओवर के बाद भी कोई मैच नहीं जीता है,परन्तु ICC के नियमो के अनुरूप यह मैच इंग्लैंड जीत चुका था,न्यूजीलैंड का सपना मात्र सपना रह गया।।

                      ICC के इन ओछी किस्म के निर्णयों से ICC का पूरा नाम international cricket council के स्थान पर international comedy council रख देना चाहिए।।

                      एक सामान्य से मैच में हजारों लाखो लोगो की भावनाएं समाहित एवम नज़रे आशान्वित होती है,लेकिन ये तो क्रिकेट के सबसे बड़े स्तर world cup 2019 का फाइनल मुकाबला था।दोनों देश में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति रहा होगा,जिसे इससे मतलब ना हो।।

                     अंततः ICC को ऐसे निर्णयों से बचना चाहिए, कि इतने बड़े मैच का निर्णय चौके-छक्के की संख्या से दे।
   
                    मेरे अनुसार सर्वमान्य निर्णय यही होता,कि दोनों देशों को सह विजेता घोषित किया जाता।
          
                                                     :- कृपेंद्र तिवारी
                               ।। जय हिन्द ।।

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