Tuesday, April 4, 2023

" VIP दर्शन व्यवस्था "

मंदिर की परिकल्पना ऐसे स्थल के रूप में सर्वविदित है, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति,जो उस पद्धति पर विश्वास रखता है, निर्बाध रूप से अपनी उपासना कर सके। मंदिर प्रायः सार्वजनिक स्थल ही होते है। मंदिर परिसर आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने तथा धार्मिक आचरण को निर्वहन करने का केंद्र है। मंदिर परिसर में भगवान के समक्ष सभी समान है। संवैधानिक रूप से भी हम समान है।

उपर्युक्त छायाचित्र, एक महिला के द्वारा मंदिर परिसर में तथाकथित भेदभाव(दर्शन संबंधी) का विरोध करते हुए गर्भगृह में जाकर शिव जी पर जल चढ़ाने,उनकी पूजा-अर्चना  का है। सामान्य दृष्टि से उन्होंने स्थापित व्यवस्था का विरोध किया और जबरिया पूजा-अर्चना किया लेकिन उन्होंने इस मध्यम से जिस विषय पर लोगो का ध्यान आकृष्ट किया वह अत्यंत महत्वपूर्ण है, कि
"क्या मंदिर जैसे धार्मिक स्थल पर आर्थिक आधार(VIP व्यवस्था) पर भेदभाव जायज है...?"


जो सर्वथा अनुचित है। 
प्रथमतः, तो ये आर्थिक सक्षमता के आधार पर विभेदीकरण की बात हुई। 
द्वितीय, आर्थिकता इतनी महत्वपूर्ण है, कि किसी को उनके आराध्य के पूजन से वंचित किया जा सकता है?
तृतीय और सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात, कि मंदिर परिसर कोई व्यवसायिक संस्थान नही है। लोगो की आस्था का केंद्रबिंदु है।

निश्चित ही किसी बड़े धार्मिक केंद्रों,मंदिर परिसरों में ट्रस्ट का कार्य व्यवस्था निर्धारण तथा समुचित प्रबंधन का होता है लेकिन ऐसी विभेदकारी नीति का निर्धारण न्यायसम्मत तथा व्यवहारसम्मत नही है।

मेरे अपने विचार इस VIP व्यवस्था के विरुद्ध है..........आपके विचारो की अपेक्षा में.


Sunday, January 8, 2023

शुभम मैम जन्मदिवस

मेरे जीवन का प्रथम शासकीय नियोजन हुआ,जिसका स्थान रहा छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा,क्षेत्रीय कार्यालय,दुर्ग........इस कार्यालय अथवा कार्यक्षेत्र में एक अनभिज्ञ से अदना बालक के लिए सब कुछ नया-नया सा था......इस नए पल में हमे नए के भाव से मुक्त कर नियुक्ति दिनाँक के आधार पर महज चंद दिनों की वरिष्ठ साहिबा ने कार्यालय के कार्यपद्धति से हमे भलीभाँति अवगत करा....पूर्णतः सहज किया.......ऐसे पदवी में तो हमारी महारानी साहिबा सच मे हमारी महारानी ही थीं,क्योकि वह "ज्येष्ठ संपरीक्षक " जो ठहरी......उनके तो नाम मे ही ज्येष्ठता की झलक है......... पर इस ज्येष्ठता के भाव का अहसास कभी भी नही कराया......वरन हमारे समक्ष तो वे स्वयं को एक प्रशिक्षु की भांति ही प्रस्तुत करती रही.......♥️🔥
और बात कार्यक्षेत्र का हो,तो मजा तो तभी आता है,जब वहाँ कोई मज़ाक़िया अर्थात माहौल बनाने वाला कोई तो रहें........ अब इन्हें मजाकिया नही लेकिन "लइका" अवश्य बोल सकते है......क्योकि उनके हाव-भाव में बच्चे की सादृश्यता सहज ही झलकती है......उनका बात-बात पर हँसना..…अत्यंत गंभीर माहौल को भी आनन्दमय के देता है.........ये कुछ इस समान रहता था,कि तपते धूप में बारिश की हल्की फुहार मिल जाये.......इन सभी के अतिरिक्त उनकी न दिखने वाली गंभीरता भी उन में उच्च स्तर की है.......ऐसे सरल,सहज,सभी की हितार्थी मैडम सुश्री शुभम शर्मा जी को उनके जन्मदिवस के निमित्त हमारे हृदय के अंतरतम तल से उद्वेलित भाव के साथ अनंत,असीम एवं अनेकानेक बधाइयां....... शुभकामनाएं.......💐🎂🥰🔥🥳✨

ब्रह्मांड की समस्त शक्तियों के अध्येता प्रभु श्री राम से उनके ऐसे अनुग्रह की आकांक्षा है,कि पापा जी के मुखारबिंद पर हमारे अंतरमन को प्रसन्नता प्राप्त कराने वाली मुस्कान सदैव अंकित रहे........♥️🙏

हमारी आपसे यही आकांक्षा है,आपसे कि आप शीघ्र ही प्रशासन के शीर्ष पर पदस्थ होवें...... और हमे गर्वित होने का अवसर प्रदान करें......✨🔥🥰

इन्ही शुभकामनाओ के साथ.......💐🎂

Friday, December 9, 2022

आजादी की अमर कहानी

आजादी की अमर कहानी चलो सुनाऊ क्या है वो
बलिदानों की चिर कथाएं, सुनो बताऊं क्या है वो

सतत समर्पण करते आये, जन्मभूमि के मण्डन में
प्राण दिए न्यौछावर सबने,मातृभूमि के वंदन में
ललक जगी थी मातृभूमि,को आजादी दिलवानी है
वीर सपूत सब जाग उठे,माँ की सम्मान बचानी है
क्या कोड़े,क्या फाँसी,सब यत्नों को सहते जाना है
एकबिंदु मनोचित्तवृत्ति से,नौका को पार लगाना है
बलिदानों की कोटि कथाएँ,नही संभव गिन पाने में
देश के कुछ नेता ही जाने,बलिदानों के खजाने में
नमन करे बलिदानों को,आजादी है दिलवाए वो

नेता जी ने बल पर अपने,हिन्द-फौज को खड़ा किया
क्रांति की ज्वाला को उसने,पाल-पोष कर बड़ा किया
नेता जी के नेतृ गुणों ने,गोरो को लोहा मनवाया था
हिटलर जैसे तानाशाही से,नेता कहकर बुलवाया था
नरमपंथी के नरम नीति को,सिरे से अस्वीकार किया
आजादी के लक्ष्यों पर केवल,मातृभूमि से प्यार किया
तुम खून दियो आजादी दूंगा,नेता जी ने चिल्लाया था
दिल्ली चलो का नारा देकर,दिल्ली भी बुलवाया था
सतत प्रयत्नों के बूते पर,जय-हिंद बुलवाए है वो

तिलककाल में राष्ट्रवाद की, ज्वालायें प्रस्फुटित हुए
खुदीराम,चाकी,सावरकर,जैसे योद्धा अवतरित हुए
जन्मसिद्ध अधिकार मान,स्वराज्य भाव को बड़ा किया
होमरूल जैसे प्रकल्प को,तिलक-बिसेन्ट ने खड़ा किया
मराठा-केसरी के गुंजो से,सत्ता को भीतरघात किया
लाल-बाल की तिकड़ी से,खतरा गोरो ने भांप लिया
गणपति-उत्सव,शिवा-जयंती,प्रारम्भ जिसने करवाया था
जय शिवाजी,गणपति बप्पा,नारा जिसने लगवाया था
वीरप्रतापी तिलक महोदय,वंदे मातरम कहवाये वो

राजगुरु,सुखदेव,भगतसिंह,फंदों पर हँसते झूल गए
मातृभूमि की रक्षा खातिर,घर-परिवार को भूल गए
सहज उम्र,समकक्षी अपने,प्राण दिए बलिदानी वो
गोरी-नीति से खूब लड़े,पर हार न माने अभिमानी वो
आजाद गए आजाद हुए हम,कैसे भूलेंगे कहानी वो
समरांगण पर सदैव स्वतंत्र,स्वतंत्र गए अभिमानी वो
मूँछे ताने गुर्राते,हम शेर भवानी के है वो

Friday, November 25, 2022

न्यूज़

https://cgmitan.com/pandariyas-kripendra-tiwari-selected-in-food-inspector-recruitment-exam/

Wednesday, November 9, 2022

"कार्यक्षेत्र में प्रथम दिवस के लिए यात्रा और उसका अनुभव"



आज के दिवस का प्रारम्भ प्रातः काल मे 4:30 में हुआ। ये रहा अपने निज निवास पंडरिया से अपने कार्यक्षेत्र में गमन करने के लिए तैयारी का क्रम। कड़ाके के ठंड के दरमियाँ पूर्वाह्न 5:15 में पंडरिया से दुर्ग के छूटने वाली बस के लिए तैयार होकर सहशरीर 5:15 को पहुँचा ही था,कि बस 100 मीटर आगे निकल चुकी थी। ये एक संयोग मात्र ही था,कि बस के कंडक्टर के द्वारा वहाँ से बाइक में आगे बस में बैठने के लिए जाया जा रहा था। उन्होंने किसी चित-परिचित की भाँति मेरे मन की व्यथा को समझते हुए,मुझे अपने ही बाइक में बिना किसी ऐसे भाव के (मेरे बाइक में 3 लोग कैसे बैठेंगे) निःसंकोच बैठने के लिए कहा और बस में बैठाने/पकड़ाने में उनकी   महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह भी हो सकता है,कि वे अपने आर्थिक लाभ की दृष्टि से हमारी मदद किये,हो लेकिन जिस नेक उद्देश्य हेतु घर से पूजनीय माता-पिता जी के द्वारा मेरा विदा किया गया था। उस हेतु तो वे अतिधान्यवाद के पात्र है,अन्यथा वह उद्देश्य धरा का धरा रह जाता।

पूर्वाह्न 5:15 से चलने वाली बस का दुर्ग में 10:25 को पहुँचने में लगने वाला समय लगभग 5 घण्टा,10 मिनट का सफर का अधिकांश भाग शीतलहर से प्रभावित रहा और उससे बचते-बचते गर्मवस्त्र के आगोश में सोते हुए व्यतीत हुआ।

दुर्ग पहुँचने के पश्चात स्थानीय निज निवास पहुँचकर निजी वाहन से आदरणीय एवं सम्माननीय श्री गूगल मैप के माध्यम से सहायता प्राप्त करते हुए,वर्तमान में कार्यमुक्ति के पश्चात प्राप्त हुआ प्रथम निकाय "जनपद पंचायत,पाटन" में बड़े धूलधक्कड़ का सामना करते हुए पहुँचा।

पाटन का सम्बंध वर्तमान में हमारे राज्य के आदरणीय मुख्यमंत्री जी के गृहक्षेत्र से होने के कारण, इसकी छवि जिस प्रकार से मेरे मनमस्तिष्क में घर की हुई थी,उसको गहरा आघात पहुँचा। इस आघात का कारण यह रहा,कि मध्य मार्ग में पथनिर्माण कार्य के कारण हमे हुए परेशानी........धूल का गुबार ऐसा रहा,कि घर से बिना किसी मेकअप(साज-श्रृंगार) के मेकअप का आनंद प्राप्त हो गया।

जनपद पंचायत पाटन में पहुँचने पर क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग के द्वारा निर्धारित कार्यक्रमानुसार ज्येष्ठ संपरीक्षक आदरणीय श्री कमलेश कुमार सोनवानी के द्वारा मुझे इस कार्यालय से परिचित कराया गया। इस पल ही मन मे संकोच था,कि पहला दिवस में कफ्यले से सामंजस्य किस प्रकार बनाना है,लेकिन कुछ ही क्षण में सभी से परिचय पश्चात मैं स्वयं को अत्यंत सहज स्थिति में पाया,कि मैं अपने दुर्ग के ही कार्यालय में हूँ।

इसी क्रम में मेरे द्वारा अपने ज्येष्ठ अधिकारी जी को उपस्थिति पत्र प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात कार्य प्रशिक्षण का सत्र श्री सर के द्वारा लिया गया। प्रथम दिवस के मद्देनज़र ओझल की स्थिति से बचने के लिए तत्संबंधी सामान्य जानकारी ही प्रदान किया गया। जो मेरे लिए बिल्कुल ही नवीन था,यह एक विशेष अनुभव दिलाने वाला था। जो इस प्रकार था,जैसे कक्षा छठवी के बच्चे को संस्कृत सिखाया जा रहा है। कुछ चीजें हिंदी और संस्कृत में समरूपता के कारण जो समझ आता है,वैसे ही समझ आ रहे थे। तो कुछ ज्ञान लट्टलकार/लृट्टलकार की भाँति अत्यंत नवीन थे।


कुल मिलाकर यह दिवस एक जिज्ञाषु छात्र के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा। जो जीवन के विशेष स्मरण के रूप में मनमस्तिष्क में अंकित हुआ।



Tuesday, November 1, 2022

" छत्तीसगढ़िया,सबले बढ़िया "

" छत्तीसगढ़िया,सबले बढ़िया "

उर्ध्वलिखित पंक्ति,जो छत्तीसगढ़वासियों के लिए स्वयं पर गर्व भाव को जागृत करने की पंक्ति है,की वर्तमान प्रासंगिकता किस स्तर की है.....??

क्या यह केवल नारा मात्र है......??
यह अपने में कौन-कौन से भाव को अन्तरग्रहीत किया हुआ है.....??

निःसंदेह स्वयं के किसी क्षेत्रविशेष से सम्बद्धता को लेकर व्यक्ति के मन मे गर्व का भाव होना सहज है......यह आपकी विशिष्टता के लिए भी आवश्यक है......उस क्षेत्र विशेष का नाम आपके व्यक्तित्व के आधार पर ख्यातिप्राप्त करें,इस हेतु भी महत्वपूर्ण है.........

उपर्युक्त बातो के इतर जब हम उस पंक्ति का उपयोग स्वयं की श्रेष्ठता के लिए करते है,तो क्या हम उसे समझ भी पाते है......कि क्या इस पंक्ति को कह देना बस ही,हमारे छत्तीसगढ़ के प्रति कृतज्ञता को व्यक्त करता है......??

प्रथमतः इस हेतु हमे इनके भाव को ग्रहण करते हुए,अपने में ऐसी क्षमता विकसित करना है,कि हम जिस क्षेत्र में हो,चाहे वह व्यापार-वाणिज्य,शिक्षा,कला,क्रीड़ा(खेल) आदि,उस क्षेत्र विशेष में नेतृवकर्ता रहें। जो लोगो के बीच मिसाल के रूप में पेश हो.......

द्वितीय: इस पंक्ति का प्रयोग करने का उद्देश्य,कदापि यह नही होना चाहिए,कि हम इससे दुसरो की निकृष्टता को सिद्ध करें.......शांतिप्रिय सहअस्तित्व की भावना हमारे संस्कृति का मूलाधार है......हमे सभी वर्गों,परंपराओं, संस्कृतियों के साथ "संगच्छद्वम् संवद्धवम्" के भाव से एकाकार होना चाहिए......ऐसे भाव ही पंक्ति की सार्थकता को सिद्ध करेगा......

तृतीय: हमारा प्रयास ही इस स्तर का हो,कि यह पंक्ति अपनी सार्वभौमिकता को प्राप्त करने की ओर अग्रसर हो.......यह अत्यंत प्रभावी तब होगा,जब इसे हमारे स्थान पर अन्य के द्वारा प्रयोग किया जाएगा.......जैसे कि व्यापार के क्षेत्र में गुजरात जैसे राज्य की स्थिति को हम सभी स्वीकार करते है......संस्कृति संरक्षण के मामले में दक्षिण भारत की स्थिति को स्वीकार करते है.......कुछ इसी तरह हमे अपनी क्षमता,स्वभाव से इस ओर प्रयास की आवश्यकता है.....

लेकिन दुविधा यह है,कि जो व्यक्ति इस पंक्ति को प्रयोग करता है,वह ही बड़े-बड़े मंचों,स्थानों या छत्तीसगढ़ से परे अन्य क्षेत्र में इसका प्रयोग करने से स्वयं को पृथक रखते है,उनमे छत्तीसगढ़ संस्कृति से स्वयं की सम्बद्धता प्रदर्शित करना हीनता का भाव पैदा करता है.......ऐसी वृत्ति का त्याग अत्यावश्यक है......इस हेतु हमे मराठा संस्कृति से सीख लेना चाहिए.......

इन्ही कुछ विचारो के साथ आप सभी को छत्तीसगढ़ निर्माण दिवस(राज्योत्सव) की अनेकानेक,गाड़ा-गाड़ा एवं असीमित शुभकामनाएं.......प्रयास करें हम सभी समृद्ध एवं नैतिक छत्तीसगढ़ निर्माण हेतु सतत प्रयत्नरत रहे.........

आपका......😊

Monday, October 31, 2022

"आरक्षण मामले का दंश झेल रहे छात्र "

लगभग दो वर्ष के कोरोना महामारी के दौर में सरकारी नियोजन(नौकरी) में हुए स्थगन के पश्चात "भर्ती प्रक्रिया" ने दम भरना प्रारम्भ ही किया था,गति का अनुभव कुछ मात्रा में छात्रों ने लिया ही था,कुछ एक भर्ती लाखो छात्रों के मन मे यह उम्मीद तो जगा रखा था,कि आने वाले सत्र हम अपना झंडा अवश्य ही परचम कर सकेंगे,अब रुकेंगे नही,थकेंगे नही,ले के रहेंगे आजादी जैसे नारो में आजादी को नौकरी से प्रतिस्थापित कर मन मे दृढ़ संकल्पित भाव से तैयारी कर रहे थे/है .........लेकिन इसी मध्य 2012 में लिए गए तत्कालीन सरकार का निर्णय,जिसमे छत्तीसगढ़ में आरक्षण की सीमा को 50% से उल्लंघित करते हुए....58% कर दिया था........जो मामला किसी याचिकाकर्ता के माध्यम से संवैधानिकता के आधार तले उच्च न्यायालय में दाखिल हुआ........ 

यहाँ से आरक्षण जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बिसात की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है,यह छात्रों(राज्य प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रहे माहौल में कहा जाए तो "एस्पिरेन्ट") के मध्य चर्चा का विषय बनाता है.......और कुछ समय मामला न्यायालयीन प्रक्रिया में ओझल होता है.....राजनीतिक चाल सिद्ध होता है मामला धर में लटका रहता है...... 

धीरे से राज्य के तैयारी कर रहे छात्र और सारे प्रशासनिक महकमा इस पद्धति को आत्मसात कर सहज हो गए थे......इस अनुरूप ही अपने को चयनित करने की स्ट्रैटेजी(रणनीति) में तैयारी करने प्रारम्भ किये और चयनित भी होते गए....... 

वह प्रक्रिया जिसके तहत हमने भी तैयारी की है,उसके अनुरूप ही भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए.......इसी दरमियान Cgpsc21 के साक्षात्कार (iterview) के एक दिवस पूर्व ही(अब इसे संयोग कहे या.....) 2012 आरक्षण संशोधन संबंधी मामला का निर्णय आता है,जो चलते आ रही 58% आरक्षण रोस्टर को असंवैधानिक घोषित करती है.......... 

जिसके पश्चात भी साक्षात्कार लिया गया......इस निर्णय संबंधी मामले की गंभीरता को ऐस्पिरेन्ट(छात्रों) के द्वारा तब तक नही समझा गया था,जब तक छात्र परिणाम का इंतजार कर-कर के तंग हो गए और अन्ततः यह ज्ञात होने तक,कि इस विलंब कारण तो 19 सितम्बर को माननीय उच्च न्यायालय के द्वरा दिया गया निर्णय था....... 

यह तो राज्य प्रशासनिक सेवा के संदर्भ में था........कुछ इसी प्रकार अन्य भर्तियां(जिनका दस्तावेज सत्यापन तक हो चक है,जिनकी केवल नियुक्ति आदेश का इंतजार था,ऐसे परीक्षा) जैसे खाद्य निरीक्षक आदि जैसे मामले ठंडे बस्ते में चली गई है........ 

इसी तारतम्य में लंबे वर्षो से अधर पर लटका हुआ "उप निरीक्षक" की परीक्षा,जो जैसे तैसे लिया जा रहा था,वह भी स्थगित किया गया.......जो भविष्य के अंधकार में छात्रों की भावनाओ,संवेदनाओ और धैर्य को समेटे हुए कही लुप्त सा प्रतीत होता है.......आगे क्रम में अनेक प्रक्रिया.....ACF साक्षात्कार,महाविद्यालयिन भर्तियाँ..... आदि है..... 

इस प्रकार छात्रों के समक्ष अब प्रश्नचिह्न खड़ा होता है,कि
1) उनके धैर्य की परीक्षा कब तक होगी......??.....(इसमें अब छात्रों के लिए चयन हेतु मुख्यतः दो परीक्षा पास करना अनिवार्य हो गया है,एक मुख्य परीक्षा और दूसरा धैर्य की परीक्षा)
2)इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन...??......(राजनीतिक स्वार्थगत प्रेरित सरकार या न्यायालयीन विलंबता........लेकिन यह न्यायालयीन मामला बना ही क्यो.....?)
3)आगे समाधान का राह भी क्या निष्पक्ष होगा,कि वह भी राजनीति से प्रेरित......??

कुल मिलाकर छात्रों के हितों को गर्त की ओर उन्नयित(धकेला) किया जा रहा है......सत्ता अपना स्वार्थ साधती रही है/साधती रहेगी.......और हम ठहरे कोल्हू के बैल जो घिसे चले जा रहे है......... 

ठीक है सबके लिए तो सरकारी नियोजन उपलब्ध न हो लेकिन जो है उसकी प्रक्रिया को तो निर्विवाद रहने दो........अब इसे अनुनय-विनय समझे या विरोध,ये समझने वाले के ऊपर है........ 

इन्ही विचारो के साथ आपके विचारों की अपेक्षा में आपका........😊 है......... 


" VIP दर्शन व्यवस्था "

मंदिर की परिकल्पना ऐसे स्थल के रूप में सर्वविदित है, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति,जो उस पद्धति पर विश्वास रखता है, निर्बाध रूप से अपनी उपासना कर सक...