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Sunday, March 3, 2019

आतंकवाद

आतंकवाद किसी व्यक्ति विशेष या धर्म के प्रति उत्पात से युक्त उन्माद न होकर सम्पूर्ण मानव समाज के लिए घातक है।।

हिंसा में व्यक्ति दो कारणों से लिप्त हो सकता है,एक उचित न्याय एवं अपने अनुरूप मांग की प्राप्ति हेतु और दूसरा बिना किसी लक्ष्य के सामाजिक ताना-बाना के विखंडन हेतु। हिंसा में लिप्त आतंकवाद भी है और नक्सलवाद भी।

पर नक्सलवाद का एक मोटो है,कि केंद्रीय सत्ता पर अपना हक प्राप्त करना अर्थात अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना,इस कारण 80-90 के दशक में सरकार उनके मांगो को सुनती भी थी।बशर्ते वर्तमान समयो में नक्सलवाद भी अपने मोटो हटकर आतंक मार्ग पर अग्रेषित हो रहाहै।जिससे सरकार भी उसके प्रति अब दमनात्मक नीति अपना रही है।।

इस प्रकार मांग एवं न्याय प्राप्ति हेतु आतंक को कतई ही पवित्र साधन के रूप में स्वीकार नही किया जा सकता है,परिणामतःआतंकवाद विश्व के सामने एक गंभीर समस्या के रूप में उभरा है।अतःआतंक किसी भी कीमत पर श्रेष्ठकर नही हो सकता है।।

जहा तक भारत की बात है,तो हम "वसुधैव कुटुम्बकम" एवं "अहिंसा परमोधर्म" के सिद्धांतों को आदर्श मानकर जीवनपथ पर गतिमान रहते है।।

आज आतंकवाद के विषय पर वैश्विक मंथन की आवश्यकता है,जिसे लेकर भारत के तात्कालिक प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा सम्पूर्ण विश्व के देशों को एक मंच पर,एक दृष्टिकोण के साथ खड़े हो का सकारात्मक पहल किया गया।।

तात्कालिक स्थिति में,जिस प्रकार भारत के द्वारा 26/2 को पड़ोसी देश के आंतकी शिविरो पर "मिराज-2000" के द्वारा 1000 किलो विस्फोटक के गिराव से कही न कही आतंकवाद सख्ते में है।ऐसे में विश्व के विभिन्न देशों को यह प्रयास की भी आवश्यकता है,कि जो देश इस प्रकार निष्कृष्ट विचारो का समर्थन करता हो या उसको पनाह देता हो,उसका वैश्विक स्तर पर घेराबंदी हो।।

अंततः ऐसे प्रयासों एवं योजनाओ की आवश्यकता है,जो उनका जड़ से खात्मा कर सके।।

और आवश्यकता इस बात की और अधिक है,कि विश्व के सभी देश इस परिपाटी पर सदैव संगठनात्मक रूप से प्रतिबद्ध होकर निर्णय लेने हेतु तत्पर रहे।।

" VIP दर्शन व्यवस्था "

मंदिर की परिकल्पना ऐसे स्थल के रूप में सर्वविदित है, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति,जो उस पद्धति पर विश्वास रखता है, निर्बाध रूप से अपनी उपासना कर सक...