Thursday, May 27, 2021

ब्राह्मणजनों का दायित्व

आज के समाज को विद्वत पंडितो की आवश्यकता है,क्योकि बिना किसी तर्क के चली आ रही परंपरा आज के बुद्धजीवी वर्ग को रूढ़िवादी अथवा अंधविश्वास प्रतीत होती है........इस प्रकार,ऐसे ज्ञानवर्धन से सांकेतिक और प्रेरणादायी परंपरा मे रूढ़िवादी रूपी धूल,जो परत के रूप में जमी हुई है,जिससे यह उपयोगिताविहीन अथवा व्यर्थ लगती है,उस धूल के निवारण और स्वच्छिकरण हेतु आवश्यकता है............


क्योकि आज जनमानस का संस्कृत के प्रति विलगाव हो गया है,कारण भी सही है,कि संस्कृत के ज्ञान से हमे प्राप्त क्या होगा....???

तो संस्कृत के इस विमुखीकरण के दौर में संस्कृत की समझ किसे.......परंपरा की समझ किसे....??

तो ऐसे पंडितो/ब्राह्मणजनों की अनिवार्य आवश्यकता है,जो समाज को शास्त्ररूपेण मार्गदर्शित कर हमारे मन मस्तिष्क में बैठे समस्त शंशयो का निराकरण करे,जिससे हममे ऐसे अनमोल विरासत के प्रति लगाव तथा गर्व के भाव पैदा हो.........

प्राचीन समय में समाज का मार्गदर्शन ही ब्राह्मणों का कार्य हुआ करता था........जो आज के ब्राह्मणों में पण्डित्यता के अभाव में ऐसी बाते कही ओझल सी हो गई है,यही कारण है ब्राह्मण तात्कालिक समय में हास्य के पात्र तथा उनके द्वारा कराई जाने वाली कर्मकाण्ड आडंबर प्रतीत होता है............


इस निमित्त संस्कृति संरक्षण का समस्त कार्यभार केवल ब्राह्मण(जिनमे पांडित्य के गुण हो) के ऊपर ही टिकी हुई है.......👍👍

:-कृपेन्द्र तिवारी

Friday, January 8, 2021

अमेरिकी संसद में हिंसा

देश की सत्ता कैसे चले,ये हमको क्यो सिखलाते तुम।
लोकतंत्र के सही मायने,ये हमको क्यो बतलाते तुम।।

स्वयं के संसद में देखो,कि कैसे हिंसा प्रस्फुटित हुए।
स्वार्थसत्ता के भावों से,जनमत से क्यो तुम रुष्ट हुए।।

देशवासियो के निर्णय और जनमत का सम्मान करो।
सहर्ष गर्व के भावों से तुम सत्तापद से विश्राम करो।।

:-कृपेन्द्र तिवारी......







Thursday, December 31, 2020

नववर्ष,2021 पर विचार

मंदिर में दूध चढ़ाए तो,दीनन की चिंता सताने लगी
मंदिर में पैसे चढ़ाए तो,अस्पताल की यादें आने लगी।

लेकिन नववर्ष की बेला में,गहमागहमी की ये रेला में
क्या किसी ने ऐसा सोचा कि,दे कंबल उन गलियारों में।

उन राहो में न चमकचांद,बस बिखरी है दीनता की आंध
राहो में नववर्ष मनाओ तुम,जिससे मीले असीमित सुकून
जो केक काटते राहो में,रंगरलियां हो चौक-बाजारों में
इन पैसों का संयोग करो,दिनन के सुख में उपयोग करो।।

तो सोचु क्यो मैं दूध चढ़ाऊँ,क्यो न उसे मैं बांट आउ
नर में श्रीहरि नारायण देख,इन भावो को मैं बिखराउ।
पहले तो ज्ञानवानियो खुद,ऐसे गुणो को जगाना तुम
तत्पश्चात सनातनियो को,सार्थक पाठ पढ़ाना तुम ।।

:-कृपेन्द्र तिवारी........✒️✒️✒️

Saturday, December 19, 2020

संगठित होना है जरूरी.....

संगठित_होना_है_जरूरी

भारतीय इतिहास संघर्षो का इतिहास है।इसमे अनेक आक्रमणकारी प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक आये,उनके द्वारा स्थानीय शासन से परस्पर विस्तारवादी नीतिओ को लेकर संघर्ष होते रहे.......लेकिन इतिहास के अध्ययन का उद्देश्य ही होता है,कि पूर्व में दोहराई गई गलतियो का पुनःआचरण न हो....

भारतीय इतिहास में इस संघर्ष और गुलामी के पीछे के कारण को हम तर्कसंगत दृष्टिकोण से देखे तो स्पष्टीकृत होता है,कि हममे चिरकाल से लेकर अधुनातन काल तक संगठन,परस्पर सहयोग और समन्वय की भावना का अभाव रहा है। यही कारण रहा कि हमारा भारत देश एक केंद्रीकृत राष्ट्र के रूप में पूर्व से छवि बनाने में असफल रहा है....केवल अपवाद जैसे चंद्रगुप्त मौर्य जैसे शासको के शासनकाल को छोड़कर......

महत्वपूर्ण कारणों का अध्ययन करे तो दृष्टिगत होता है,कि हमारी स्वार्थिक भावना तथा साम्राज्यवादी नीतियां ऐसी रही है,कि जो हमारे लिए ही घातक सिद्ध होती रही.....ऐसी विचारधारा कि "आक्रमणकारी शत्रु राज्य पर आक्रमण कर रहा है तो मुझे क्या मतलब" ऐसे भाव ही हमारे गुलाम होने का सबसे महत्वपूर्ण कारण है.......जो हमारे पूर्वजो के संकीर्ण मानसिकता का उपज है..........

हमे "unity is strength" अर्थात एकता में ही शक्ति है के मूलभूत भाव को आत्मसात करना चाहिए.....और आज के परिदृश्य में यही हमारी एकता का भाव,आक्रमणकारी बाबर के सेनापति "मीर बाकी" के द्वारा 1528 में तोड़े गए मंदिर के पश्चात किये गए मस्जिद निर्माण के क्रूरतम कदम का निवारण आज कर रही है......इसका मुख्य कारण है हिन्दू पक्ष का जागृत होना.....एकमय होना.......सुसंगठित होना.......

इस जागरण और एकमय भावना को प्रसारित करने के संघर्ष में लाखों हिन्दू बंधु-बांधव और हमारे पूर्वजो ने अपने प्राणों की आहुतियां दी है......इसी जागरण और एकता के सूत्र में पिरोने का संकल्प ले "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ" की नींव रखी गई......जो सार्थक और प्रभावी रूप से लोगो के अंतर्मन में राष्ट्रप्रेम,धर्मप्रेम एवं समर्पण,ऐसा कि सर्वस्व न्यौछावर कर दे........ऐसे भाव को भारतीय जनमानस में संचार कर उनके हृदय में अन्तरग्रहीत कराये.....

इसका प्रतिफल हमारे समक्ष है,कि वो एतिहासिक क्षण के हम साक्षी बन रहे है,जिनके लिए लाखों बलिदान हुए......."श्री रामचंद्र जी के मंदिर" का निर्माण अपने चरम पर है........

यह मंदिर केवल मात्र मंदिर नही है,बल्कि यह वह राष्ट्रमन्दिर है,जो हमे याद दिलाता रहेगा कि ये हमारी एकता का प्रतिफल है और सदैव भविष्य में इस भावना को जागृत करने हेतु प्रेरित करता रहेगा...........

तो लेख के लेखन का सार स्पष्ट है,कि हम यदि संगठित है......तो भारतवर्ष को विश्वगुरु बनने से कोई नही रोक सकता........

आपका:-कृपेन्द्र तिवारी

Thursday, December 17, 2020

गुरु घासीदास जयंती

#गुरु_घासीदास_जयंती
भारतीय समाज अनेकानेक वर्षो से फलीभूत रहा है...लेकिन समयचक्र में परिवर्तन के साथ समाज मे कुछ निम्न मानसिकताओं, अंधत्व,भेदभाव,समरसता का अभाव ने स्थान ले लिया...निश्चित ही ये विभिन्न कारक प्रगतिशील समाज के लिए घातक है.......इस हेतु समय-समय पर धार्मिक सुधार आंदोलन हुए....जिसमे 13-14 शताब्दी के मध्य भक्ति आंदोलन चरम पर था...ये धार्मिक आंदोलन धार्मिक जागरूकता फैलाने तथा धर्म के प्रति लोगो का ध्यान आकृष्ट करने का कारण बना...लेकिन इस समयकाल में भी कुछ संतो के द्वारा अपने रचनाओं में तात्कालिक समाज की कुरीतियो और उनकी जड़तारूपी दशा को इंगित कर उस पर कुठाराघात करने का भरसक प्रयास किया गया...जिसमे प्रमुख रूप से संत कबीर दास,तुलसीदास,नानक,दादूदयाल इत्यादि थे...जो सामाजिक सुधार के क्षेत्र में विशेष ध्यान एवं योगदान दिए.....

भारतीय समाज मे हुए अनेक आक्रमण,आतताइयों तथा कुछ प्रबुद्ध वर्ग(जो मात्र जाति से उच्च हो के साथ-साथ प्रत्येक वर्ग,जो सम्पन्न हो) के द्वारा हमारे समाज का शोषण तथा सामाजिक तानेबाने को ध्वस्त करने का प्रयास किया गया जो इस हेतु पूर्णरूपेण जिम्मेदार है......सामाजिक क्रांति के इसी कड़ी में  सन 1756 में छत्तीसगढ़ की पावन धरा में गिरौदपुरी(बलौदाबाजार) नामक स्थान में एक सामाजिक संत "गुरु घासीदास" जी का प्रादुर्भाव हुआ...

जिन्होंने भारतीय समाज मे व्यापित विकृतियो,जिसमे भेदभाव का स्थान चरम पर था,के उन्मूलन हेतु अविस्मरणीय योगदान दिए...बचपन से वैराग्य वृत्ति के धनी घासीदास जी ने सन 1820 में सतनाम पंथ की स्थापना की...जिसके अनुयायी "सतनामी" अर्थात "सत्य के नाम पर चलने वाला" कहलाये...

इन्होंने अपने मत में मूर्तिपूजा,समाज मे व्याप्त पशुबलि,हिंसा जैसे मान्यताओ को सिरे से नकार कर उनका विरोध किया...तथा अपने पंथ के अंतर्गत निम्नांकित 7 उपदेशो के माध्यम से सामाजिक क्रांति लाने का प्रयास किये...
1.मादक पदार्थ से परहेज
2.मांस भक्षण का परित्याग
3.सामाजिक समरसता के भाव का अंतर्ग्रहण
4.मूर्तिपूजा का विरोध
5.गयो से हल के माध्यम से जोताई बंद
6.दोपहर में हल चलाना बंद
7.सत्पुरुष सतनाम की निराकार उपासना.......आदि

आज इस पावन दिवस पर घासीदास जी के द्वारा दिये उपर्युक्त उपदेशो को हम जनमानस अपने जीवन मे किस स्तर पर अंतर्ग्रहित किये है...इस हेतु हमें मंथन करने की आवश्यकता है...जो गुरु घासीदास जी की जयंती को मनाने के लिए उचित कारण होगा,कि उनके उपदेश को आत्मसात कर सत्य के मार्ग पर चले और आज के समाज मे जागरूकता फैला सके...यही उनके जयंती पर हमारी सच्ची एवं निष्पक्ष भावार्पण होगी...

क्योकि आज समाज केआ भ्रष्टाचार,चोरी,झूठ के बुनियाद पे टिके होने से निवारण का उपाय मात्र...उनके उपदेशो का ससम्मान आचरण करना है.......यही प्रति हमारी सच्ची कृतज्ञता होगी ❤️❤️❤️💐💐💐🙏🙏🙏


#आपका:-कृपेन्द्र तिवारी

Tuesday, October 13, 2020

जन्मदिवस शुभकामनाये..... दीवान सर.....

शासकीय ई. राघवेन्द्र राव स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय में सुचना प्रद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष,विज्ञान महाविद्यालय में ज्ञानार्जन हेतु आगंतुक नवपल्लवीत पुष्परूपी छात्रों के लिए एक ऐसे प्रेरणा पुंज,जिससे प्रकाशित होकर छात्र इस विशाल चराचर,प्रतिस्पर्धात्मक भौतिक जगत के आभामंडल में एक सूक्ष्म तारा (जो स्वयं प्रकाशित होने में सक्षम हो) का अतित्व स्थापित कर पाता है.........


ऐसे गुरु,जो महाविद्यालयीन सीमा को उल्लंघित कर प्रत्येक छात्र(जिसको एक मात्र सहारे की तलाश हो) को अपने प्रेरणास्पद वचनों से छात्रो को अपने इस सूक्ष्मतम जीवन मे उन विशालतम उचाईयो को प्राप्त करने के लिए(जिसकी परिकल्पना छात्रजीवन में करना,मात्र एक काल्पनिक कथा हो) मार्गदर्शित एवं प्रेरित करती है............


एक ऐसे नेतृत्वकर्ता,जिनके नेतृत्व की प्रामाणिकता इस तथ्य से अनुभवित किया जा सकता है,कि उनका कार्यभार अर्थात जिम्मेदारियों का दायरा क्या रहा है......इसकी चर्चा करना मात्र चर्चा की अनंतता को इंगित करता है अर्थात ऐसी चर्चा जिसका अंत न हो........इसका उदाहरण महाविद्यालयीन स्तर पर हो या चाहे अन्य क्षेत्र में हो..........चाहे वह सूचना प्रद्योगिकी विभाग के विभाध्यक के पद का संचालन करना हो या ऐसे शासकीय संगठन(जिसका उद्देश्य समाज के निर्माण करने वाले स्वयंसेवको का निर्माण करना हो)NSS,NCC के जिम्मेदारियों का पालन राष्ट्रीयता के भावना से परिपूरित होकर करना,जिससे यह स्वयंसेवक आगे समाज को एक स्वस्थ,सुगम एवं स्वत्रंतता रूपी दिशा में संचालित करे.........चाहे वह राज्य सरकार के निर्वाचन आयोग(जिसका निर्वाचन सम्पन्न कराने में सर्वोच्च स्थान है) में मास्टर ट्रेनर की भूमिका के रूप में प्रशिक्षण का कार्य हो.......ऐसी अनंत कार्य है.....जिनकी चर्चाएं अनंत है.......


एक ऐसे समाज सेवक,जो निर्विकार भाव से सदैव समर्पित होकर उसकी उन्नति हेतु प्रयत्नरत रहते है.......समाज के प्रति उनका समर्पण का अंदाजा बौद्धिक(शैक्षणिक),आर्थिक,शारीरिक एवं मानसिक रूप से संलिप्तता के दर्शन मात्र से लगाया जा सकता है..........सामाजिक दायर ऐसा कि, विश्व के सबसे बड़े संगठन के जिला स्तर पर छात्रों का प्रतिनिधित्व करते है.............


मेरे व्यक्तिगत जीवन मे....महाविद्यालय में प्रवेश के कुछ समय मे सम्पर्कित होने के पश्चात(ऐसे शिक्षक,जिनसे न चाहते हुए छात्र उनकी आभा से आकर्षित हो जाये,कुछ इसी प्रकार सर के संपर्क में आने के पश्चात) से लेकर सम्पूर्ण महाविद्यालयीन सफर में बिलासपुर जैसे अनजान जगहों पर एक जिम्मेदार पालक के दायित्व का निर्वहन करने के साथ,पितातुल्यता के भाव से प्रेरित एवं मार्गदर्शित कर जीवन पथ पर शास्वत रूप से कंटकाकीर्ण मार्गों के कांटो को अपने पुरुषार्थो से दूर करते हुए.........गतिमान होने हेतु प्रेरित करते है.......वो भी केवल मात्र एक निर्विकार एवं निस्वार्थ आकांक्षा,कि मेरे छात्र मानवीय जीवन के असीमित उचाईयो को(जो मानवीय कल्पनाओ में अस्तित्व रखता है)प्राप्त कर सके...........


ऐसे आदरणीय,सम्माननीय एवं पूज्यनीय गुरुवर,आचार्य श्री तरुणधर दीवान सर जी को उनके जन्मदिवस के इस शुभ एवं आंनदित अवसर पर हृदय की अन्तरतल से उद्वेलित भाव से अनंत,असीमित एवं अपर शुभकामनाये........💐🎂💐🎂



 ब्रम्हांड की समस्त ऊर्जाओं एवं शक्तियों से यही निवेदन की आप इसी प्रकार सफलता के असीम उचाईयो की प्राप्ति हेतु.....सदैव अग्रसर रहे एवं सफलता प्राप्त करते रहे......जिससे हमें गर्वित होने का अवसर प्राप्त होता रहे और हम भी आपके अनुगामी बन सके............आपके स्नेह एवं आशीर्वाद रूपी छाया हम पर सदैव आच्छादित हो..........इन्ही कामनाओ के साथ प्रणाम एवं सादर चरणस्पर्श सर.....🥰🥰❤️❤️


आपका अपना:- कृपेन्द्र तिवारी

Saturday, September 5, 2020

गुरु

दिप सम प्रज्वलित होकर,हरण करें तम अंधकार।
माली बन सींचे कमल सम,उस गुरु के हम कर्जदार।।

:-कृपेन्द्र तिवारी

" VIP दर्शन व्यवस्था "

मंदिर की परिकल्पना ऐसे स्थल के रूप में सर्वविदित है, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति,जो उस पद्धति पर विश्वास रखता है, निर्बाध रूप से अपनी उपासना कर सक...