#गुरु_घासीदास_जयंती
भारतीय समाज अनेकानेक वर्षो से फलीभूत रहा है...लेकिन समयचक्र में परिवर्तन के साथ समाज मे कुछ निम्न मानसिकताओं, अंधत्व,भेदभाव,समरसता का अभाव ने स्थान ले लिया...निश्चित ही ये विभिन्न कारक प्रगतिशील समाज के लिए घातक है.......इस हेतु समय-समय पर धार्मिक सुधार आंदोलन हुए....जिसमे 13-14 शताब्दी के मध्य भक्ति आंदोलन चरम पर था...ये धार्मिक आंदोलन धार्मिक जागरूकता फैलाने तथा धर्म के प्रति लोगो का ध्यान आकृष्ट करने का कारण बना...लेकिन इस समयकाल में भी कुछ संतो के द्वारा अपने रचनाओं में तात्कालिक समाज की कुरीतियो और उनकी जड़तारूपी दशा को इंगित कर उस पर कुठाराघात करने का भरसक प्रयास किया गया...जिसमे प्रमुख रूप से संत कबीर दास,तुलसीदास,नानक,दादूदयाल इत्यादि थे...जो सामाजिक सुधार के क्षेत्र में विशेष ध्यान एवं योगदान दिए.....
भारतीय समाज मे हुए अनेक आक्रमण,आतताइयों तथा कुछ प्रबुद्ध वर्ग(जो मात्र जाति से उच्च हो के साथ-साथ प्रत्येक वर्ग,जो सम्पन्न हो) के द्वारा हमारे समाज का शोषण तथा सामाजिक तानेबाने को ध्वस्त करने का प्रयास किया गया जो इस हेतु पूर्णरूपेण जिम्मेदार है......सामाजिक क्रांति के इसी कड़ी में सन 1756 में छत्तीसगढ़ की पावन धरा में गिरौदपुरी(बलौदाबाजार) नामक स्थान में एक सामाजिक संत "गुरु घासीदास" जी का प्रादुर्भाव हुआ...
जिन्होंने भारतीय समाज मे व्यापित विकृतियो,जिसमे भेदभाव का स्थान चरम पर था,के उन्मूलन हेतु अविस्मरणीय योगदान दिए...बचपन से वैराग्य वृत्ति के धनी घासीदास जी ने सन 1820 में सतनाम पंथ की स्थापना की...जिसके अनुयायी "सतनामी" अर्थात "सत्य के नाम पर चलने वाला" कहलाये...
इन्होंने अपने मत में मूर्तिपूजा,समाज मे व्याप्त पशुबलि,हिंसा जैसे मान्यताओ को सिरे से नकार कर उनका विरोध किया...तथा अपने पंथ के अंतर्गत निम्नांकित 7 उपदेशो के माध्यम से सामाजिक क्रांति लाने का प्रयास किये...
1.मादक पदार्थ से परहेज
2.मांस भक्षण का परित्याग
3.सामाजिक समरसता के भाव का अंतर्ग्रहण
4.मूर्तिपूजा का विरोध
5.गयो से हल के माध्यम से जोताई बंद
6.दोपहर में हल चलाना बंद
7.सत्पुरुष सतनाम की निराकार उपासना.......आदि
आज इस पावन दिवस पर घासीदास जी के द्वारा दिये उपर्युक्त उपदेशो को हम जनमानस अपने जीवन मे किस स्तर पर अंतर्ग्रहित किये है...इस हेतु हमें मंथन करने की आवश्यकता है...जो गुरु घासीदास जी की जयंती को मनाने के लिए उचित कारण होगा,कि उनके उपदेश को आत्मसात कर सत्य के मार्ग पर चले और आज के समाज मे जागरूकता फैला सके...यही उनके जयंती पर हमारी सच्ची एवं निष्पक्ष भावार्पण होगी...
क्योकि आज समाज केआ भ्रष्टाचार,चोरी,झूठ के बुनियाद पे टिके होने से निवारण का उपाय मात्र...उनके उपदेशो का ससम्मान आचरण करना है.......यही प्रति हमारी सच्ची कृतज्ञता होगी ❤️❤️❤️💐💐💐🙏🙏🙏
#आपका:-कृपेन्द्र तिवारी
No comments:
Post a Comment