Monday, October 31, 2022

"आरक्षण मामले का दंश झेल रहे छात्र "

लगभग दो वर्ष के कोरोना महामारी के दौर में सरकारी नियोजन(नौकरी) में हुए स्थगन के पश्चात "भर्ती प्रक्रिया" ने दम भरना प्रारम्भ ही किया था,गति का अनुभव कुछ मात्रा में छात्रों ने लिया ही था,कुछ एक भर्ती लाखो छात्रों के मन मे यह उम्मीद तो जगा रखा था,कि आने वाले सत्र हम अपना झंडा अवश्य ही परचम कर सकेंगे,अब रुकेंगे नही,थकेंगे नही,ले के रहेंगे आजादी जैसे नारो में आजादी को नौकरी से प्रतिस्थापित कर मन मे दृढ़ संकल्पित भाव से तैयारी कर रहे थे/है .........लेकिन इसी मध्य 2012 में लिए गए तत्कालीन सरकार का निर्णय,जिसमे छत्तीसगढ़ में आरक्षण की सीमा को 50% से उल्लंघित करते हुए....58% कर दिया था........जो मामला किसी याचिकाकर्ता के माध्यम से संवैधानिकता के आधार तले उच्च न्यायालय में दाखिल हुआ........ 

यहाँ से आरक्षण जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बिसात की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है,यह छात्रों(राज्य प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रहे माहौल में कहा जाए तो "एस्पिरेन्ट") के मध्य चर्चा का विषय बनाता है.......और कुछ समय मामला न्यायालयीन प्रक्रिया में ओझल होता है.....राजनीतिक चाल सिद्ध होता है मामला धर में लटका रहता है...... 

धीरे से राज्य के तैयारी कर रहे छात्र और सारे प्रशासनिक महकमा इस पद्धति को आत्मसात कर सहज हो गए थे......इस अनुरूप ही अपने को चयनित करने की स्ट्रैटेजी(रणनीति) में तैयारी करने प्रारम्भ किये और चयनित भी होते गए....... 

वह प्रक्रिया जिसके तहत हमने भी तैयारी की है,उसके अनुरूप ही भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए.......इसी दरमियान Cgpsc21 के साक्षात्कार (iterview) के एक दिवस पूर्व ही(अब इसे संयोग कहे या.....) 2012 आरक्षण संशोधन संबंधी मामला का निर्णय आता है,जो चलते आ रही 58% आरक्षण रोस्टर को असंवैधानिक घोषित करती है.......... 

जिसके पश्चात भी साक्षात्कार लिया गया......इस निर्णय संबंधी मामले की गंभीरता को ऐस्पिरेन्ट(छात्रों) के द्वारा तब तक नही समझा गया था,जब तक छात्र परिणाम का इंतजार कर-कर के तंग हो गए और अन्ततः यह ज्ञात होने तक,कि इस विलंब कारण तो 19 सितम्बर को माननीय उच्च न्यायालय के द्वरा दिया गया निर्णय था....... 

यह तो राज्य प्रशासनिक सेवा के संदर्भ में था........कुछ इसी प्रकार अन्य भर्तियां(जिनका दस्तावेज सत्यापन तक हो चक है,जिनकी केवल नियुक्ति आदेश का इंतजार था,ऐसे परीक्षा) जैसे खाद्य निरीक्षक आदि जैसे मामले ठंडे बस्ते में चली गई है........ 

इसी तारतम्य में लंबे वर्षो से अधर पर लटका हुआ "उप निरीक्षक" की परीक्षा,जो जैसे तैसे लिया जा रहा था,वह भी स्थगित किया गया.......जो भविष्य के अंधकार में छात्रों की भावनाओ,संवेदनाओ और धैर्य को समेटे हुए कही लुप्त सा प्रतीत होता है.......आगे क्रम में अनेक प्रक्रिया.....ACF साक्षात्कार,महाविद्यालयिन भर्तियाँ..... आदि है..... 

इस प्रकार छात्रों के समक्ष अब प्रश्नचिह्न खड़ा होता है,कि
1) उनके धैर्य की परीक्षा कब तक होगी......??.....(इसमें अब छात्रों के लिए चयन हेतु मुख्यतः दो परीक्षा पास करना अनिवार्य हो गया है,एक मुख्य परीक्षा और दूसरा धैर्य की परीक्षा)
2)इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन...??......(राजनीतिक स्वार्थगत प्रेरित सरकार या न्यायालयीन विलंबता........लेकिन यह न्यायालयीन मामला बना ही क्यो.....?)
3)आगे समाधान का राह भी क्या निष्पक्ष होगा,कि वह भी राजनीति से प्रेरित......??

कुल मिलाकर छात्रों के हितों को गर्त की ओर उन्नयित(धकेला) किया जा रहा है......सत्ता अपना स्वार्थ साधती रही है/साधती रहेगी.......और हम ठहरे कोल्हू के बैल जो घिसे चले जा रहे है......... 

ठीक है सबके लिए तो सरकारी नियोजन उपलब्ध न हो लेकिन जो है उसकी प्रक्रिया को तो निर्विवाद रहने दो........अब इसे अनुनय-विनय समझे या विरोध,ये समझने वाले के ऊपर है........ 

इन्ही विचारो के साथ आपके विचारों की अपेक्षा में आपका........😊 है......... 


Saturday, October 29, 2022

छठगीत गायन को लेकर आरु साहू का विरोध

प्रदेशवासियों के मध्य वर्तमान कालखण्ड में क्षेत्रीयता को लेकर एक विशेष वृत्ति,जिसे संज्ञात्मक रूप से "क्षेत्रवाद" कहा जाता है......यह प्रबलता से दृष्टिगोचर है.......

स्वयं की संस्कृति के प्रति गौरव एवं सम्मान की भावना निःसंदेह व्यक्ति की प्राथमिकता हो,इसमें कोई दो विचार नही है........लेकिन यह प्राथमिकता ही अंतिम(एको अहं द्वितीयो नास्ति) का पर्याय साबित हो,तो यह न तो उस संस्कृति और न ही उसके अनुयायी जनमानस के लिए हितकर साबित होगा......ऐसी संकीर्ण स्वभाव व्यक्ति की अस्वीकार्यता को इंगित करता है.......उनकी द्वयवृत्ति का परिचायक है.....

तात्कालिक परिप्रेक्ष्य में यह विचार इस कारण रखा जा है,कि छत्तीसगढ़ अंचल की सुप्रसिद्ध लोकगायिका सुश्री आरु साहू जी के द्वारा भारतभूमि के महापर्व के रूप में लब्धप्रतिष्ठ "छठपर्व" से संबंधित गीत का गायन किया गया........निश्चित ही हम सब प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय होना चाहिए,कि हमारे अंचल की लोकगायिका के कला का दायरा(सीमा) इतना विस्तृत हो गया,कि वह छत्तीसगढ़ी के अतिरिक्त अन्य राज्यो से संबंधित गीतों का गायन कर रही है.........

इसी मध्य(बीच) प्रदेश के कुछ संगठन एवं समाज द्वारा उनके विरुद्ध #bycott का ट्रेंड चलाया जाने लगा.......जो इस नवपल्लवीत,समीपस्थ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचो में स्थापित गायिका के लिए बाधा उत्पन्न कर रहे थे........

कला एक ऐसी विधा है,जिसमें धर्म,लिंग,वर्ण,भाषा,क्षेत्र की सीमा को आरोपित नही किया जा सकता है......और हमे उनके गायन को गर्व के विषय के रूप में आत्मसात करना चाहिए.......

यही पर हमारे दोगले मनोवृत्ति का पर्दाफ़ाश होता है,कि एक ओर हम ऋषि सुनक जी का ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद पर चुने जाने को लेकर प्रसन्न हो स्वयं को गर्वित भाव से पेश करने में किसी भी प्रकार का कसर नही छोड़ा है.......जो न तो पूर्णतः भारतीय है......न तो पूर्णतः भारतीय संस्कृति को आत्मसात किये हुए है.....अर्थात संबंद्धता नाममात्र का भी नही लेकिन उसको अपना बनाने की होड़ में हम सब इतने आगे........

वही दूसरी ओर सुश्री आरु साहू जी के द्वारा "छठगीत" गायन का विरोध मन मे अनेक प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.........कि क्या फिर
1.क्षेत्रवाद इतना ही श्रेष्ठ है.....?
2.अन्य परम्पराओ का सम्मान स्वीकार्य नही.....?

ऐसी वृत्ति हमारी असहिष्णुता का परिचायक है......जिसका त्याग अत्यंत आवश्यक है.......हम तो ऐसी संस्कृति के वाहक हैं, जो "वसुधैव कुटुम्बकम" आदर्शो को शिरोधार्य कर जीवनयापन करता है........हमे सभी संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए.......हमे ऐसे संकीर्ण भाव के दमन हेतु भरसक प्रयास और जागरूकता की आवश्यकता है........

इसी विचार के साथ आपका......😊

शानदार,ज़बरदस्त, जिंदाबाद.........सुश्री आरु साहू जी👍

Monday, October 24, 2022

" ज्ञान वाली दीपावली "


सनातन संस्कृति के औचित्यपुरक,गौरव और गरिमा के आधारस्तंभ प्रभु श्री राम जी के द्वारा अन्याय रूपी लंका,अधर्म और असुरता के पुर(गढ़) का दमन कर निज धाम आगमन के अवसर पर नगर/ग्रामवासियों द्वारा सम्पूर्ण क्षेत्र को तात्कालिक प्रकाशिक माध्यम(दीप) से अत्यंत हर्षोल्लास एवं प्रसन्न भाव से आलोकित कर दिया गया........

तब से(सतयुग) लेकर आज तक जनमानस के द्वारा प्रभु के आगमन के स्मृति स्वरूप दीप को अवली अर्थात कतार(पंक्ति) में प्रज्वलित किया जाता है.........इस प्रकार दीपावली का ये पावन पर्व........स्वयं में अनंत ज्ञान,संदेश,प्रेरणा एवं आदर्श को समाहित किये हुए भारत मे ही अपितु सम्पूर्ण वैश्विक पटल मनाई जाती है.......

लेकिन इस हर्षोल्लास और उत्सव के मध्य कुछ वर्गों की यह वृत्ति......जनमानस की भावना को आघात पहुचाती है.....जो है इस समयकाल में उत्सव संबंधी ज्ञान के प्रसारण की है.......

तत्समय में ही एक बड़े ब्रॉडकास्टिंग एजेंसी (xyz) के द्वारा दीपावली को स्मृति पर कुछ इस प्रकार लाया गया,कि महिलाओं का इस पर्व के आयोजन के साथ ही शोषण का क्रम चलते आया है.......

यह कोई एक दृष्टांत नही है,जिससे हमारी भावनाएँ आहत होती हो......इस क्रम में चली आ रही ज्ञान प्रदाय की वृत्ति में वर्तमान समायानुक्रम में कुछ अल्पता दृष्टिगत होती है,लेकिन वृत्ति तो व्याप्त है ही............जो प्रदूषण,अतिव्ययन आदि अनेक संदर्भो पर प्रदान की जाती रही है और जाती है......

उन सभी को इस तथ्य से अवगत कारण चाहूंगा,कि हममे बौद्धिक एवं तार्किक क्षमता इतनी तो विकसित है,कि हम अपने निर्णयन में सक्षम है.....उचित क्या और अनुचित क्या?........विश्वास की सीमा क्या होगी........??

यदि फटाखा फोड़ने(प्रदूषण सम्बन्धी) के लिए ज्ञान दीपावली सम्मत हो,तो निश्चित ही मैं फटाखा फोड़ने का पक्षधर रहूँगा........ इसका अर्थ यह नही हुआ,कि मैं स्वयं फटाखा प्रस्फुटित करता हूँ........हमारी दीपावली में तो हमारे द्वारा एक भी फटाखा प्रस्फुटित नही किया जाता है.........लेकिन संदर्भवश मुझे सीमा बदलनी पड़ेगी.......इसमें मैं किंचित(तनिक भर) संशय में नही हूँ

ज्ञान एक ऐसा धन है,जिसके प्राप्ति पर किसी भी प्रकार का संकोच व्यक्ति के हित के विपरीत है........जिसका प्राप्त होना ही वरदान है......वह भी स्वत: प्राप्त होना तो फिर ईश्वरीय कृपा है........आलोचनात्मक ज्ञान हितकारी भी होता है.......उसे भी सहर्ष स्वीकार किया जा सकता है......

लेकिन आलोचना एक विशेष प्रयोजन(समक्ष को नत भाव) से हो यह स्वीकार नही.......इस प्रयोजन पर चर्चा विस्तृत है.......जिसे हम आगे करेंगे.....

आज के लिए आप सभी को अंधकार रूपी अहंकार हो ज्ञान रूपी आलोक के माध्यम से विलोपित और समूल नाश करने का संदेश देने वाले पर्व दीपावली की अनंत एवं असीमित शुभकामनाएं......... आप सभी पर प्रभु श्री राम जी एवं माँ लक्ष्मी जी की आशीर्वाद आच्छादित हो/प्राप्त हो.......आपका जीवन आनंदमय हो ऐसी कामना है हमारी........

इन्ही विचारो के साथ आपका......😊

Thursday, October 6, 2022

माँ दुर्गा विसर्जन, पंडरिया

#माँ_दुर्गा_विसर्जन

 
पंडरिया नगर में दशहरा पश्चात गत वर्ष की भाँति माँ दुर्गा जी का विसर्जन होना था......लेकिन विसर्जन कार्यक्रम में हमारे ही जनमानस के द्वारा कुछ फूहड़ता,माँ की उपस्थिति को अपमानित करने वाली गीत-संगीत का चलाना........ जनमानस की आस्था को आहत करती थी।

इसी क्रम में नवरात्र पर्व प्रारम्भ होने के पूर्व नगर के गणमान्यजन विशेषत: व्यापारी संघ पंडरिया एवं पुलिस प्रशासन के साझा सहयोग एक नवाचारी पहल किया गया......यह पहल था,कि
1) माँ के विसर्जन को एक विशेष विषय पर आधारित थीम के अनुसार विसर्जन हेतु निकलना।
2) एक निश्चित समयांतराल में सभी की उपस्थिति।
3) समिति को प्रदाय झाँकी क्रमांक के अनुरूप अपनी झाँकी प्रस्तुत करते हुए आगे बढ़ना।
4)इस कार्यक्रम में किसी भी प्रकार की अश्लीलता,फूहड़ता को शामिल नही करना,जिससे जनभावना आहत होती हो।

यह नवाचार वर्तमान में अपनी प्रासंगिकता में लगभग पूर्णता को प्राप्त करने की ओर अग्रसर रहा.......इससे आने वाले समय मे नगर को सांस्कृतिक रूप से अनेक लाभ होंगे....
1) समितियों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा विकसित होंगी।
2) इससे नगर के समिति एवं मंडल में रचनात्मकता का विकास होगा।
3) जाने अनजाने होने वाले माता के अपमान पर अंकुश लगेगा।
4) आने वाले वर्षों में पंडरिया नगर का नाम ख्यातिलब्ध होगा....साथ ही ऐसे प्रदर्शनों से समीपस्थ ग्रामीण बन्धुओ,माता-बहनों के द्वारा झाँकी दर्शन हेतु आगमन होगा।

जो निश्चित ही पंडरिया में पूर्व के राजकालीन परिदृश्य में दशहरा में जो परिवेश रहता था,उसे पुनः प्राप्त करने में सहायक होगा.....और एक उत्कृष्ट परमपरा विकसित होंगी........

ऐसी सोच के साथ आपका.......😊❤️🙏

Monday, October 3, 2022

नवरात्र आयोजन:- गरबा

सनातन धर्म बह्यन्तर कारको से अधिक अभ्यंतर कारको से विकृतता की ओर अग्रसर है..........

"गरबा" के नाम पर जो आयोजन किये जा रहे है,उसमे मुख्य विषय अर्थात केंद्रबिंदु,दैवीय आराधना का होने के अतिरिक्त(बजाय).....सारे वो साधन उपलब्ध है,जो मनोरंजन एवं अन्य मानवीय स्वार्थिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु आवश्यक है। इस तारतम्य में अनेक मंडल एवम समिति माता की आराधना एवं भक्ति जैसे तथाकथित पोस्टर छपवा कर ऐसे सेलेब्रिटी(नायिका) को मुख्य आथित्य अथवा नृत्य/गायन प्रदर्शन हेतु आमंत्रित करते है........जिन्हें माता से दूर दूर तक कोई सरोकार नही और वह मनमाने ढंग से नृत्य/गायन,जो लोगो के बीच एक मनोरंजन(@$#%) माहौल पैदा कर दे,प्रस्तुत करती है। इस पूरे क्रम उनका कोई दोष नही,क्योकि वो तो अपने कार्यक्षेत्र के अनुरूप कार्य कर रहे है। उनका तो कार्य ही है,रंगमंच पर ऐसे रस से युक्त कार्यक्रम की प्रस्तुति करना,जिस हेतु वह लब्धप्रतिष्ठ है।

इसमें मुख्य रूप जवाबदेह तो हम और हमारा ये समाज है,जो अपने ही आराध्य(माँ दुर्गा) को आधार मानते हुए कुछ तुच्छ रसास्वादन हेतु ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रहे है अथवा उसमे शामिल हो रहे है।

गरबा जैसे सांस्कृतिक नृत्य के आत्मीकरण,स्वीकार्यता एवं  प्रसार का किंचित भी विरोध नही.......अपितु उनके मूलभूत तत्व(उद्देश्य/आराधना) को अल्पीकृत करना स्वीकार नही..........

और यदि जनमानस के क्षेत्रीय गर्व की भावना को केंद्रित करते हुए बात कही जाए तो हमे प्राथमिकता "सुवा नृत्य","जसगीत" एवं "कर्मा नृत्य" को देना चाहिए,जिससे हममे स्वयं की क्षेत्रीय संस्कृति के प्रति गर्व का भाव जागृत होगा...........और संस्कृति संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य भी पूर्ण होंगे.........

और यह स्थिति फिर वर्तमान में कही जा रही तथाकथित गर्वयुक्त ध्येयवाक्य "छत्तीसगढ़िया,सबले बढ़िया" को प्रासंगिकता के पैमाने पर अस्तित्वमय करेंगी और जो अपनी यथार्थता को प्राप्त करेगी.......🤔🤔🤔

Sunday, October 2, 2022

साक्षात्कार:-29 सितम्बर,2022

🛑डॉ. मोतीलाल बाचकर सर बोर्ड 

⭕बाचकर सर:-1)मूलतः कहा के है?
2)आपने गणित(PCM) में बी.एस सी. किया है।
3)आप कौन सा पद प्राप्त करना चाहते है?
4)आप प्रशासन में क्यो आना चाहते है?
5)सारे पदों में DC को ही प्राथमिकता क्यो?
6)DC बनने पर क्या कार्य करेंगे?
7)वनांचल क्षेत्र के विकास में आपका योगदान।
8)आर्थिक स्थिरता तो अन्य पदों में भी?
9)गणित(PCM) में बी.एस सी. के पश्चात एम.ए.(इतिहास) क्यो? 
10)संपरिक्षक के क्या कार्य होता है?
11)अनुदान प्राप्त निकाय क्या है? उनका नाम बताइये।

⭕साव सर:-1)गणित का प्रशासन में क्या उपयोग है?
2)एक पेपर में कुछ चित्र(त्रिभुज,चतुर्भुज) बनाकर उसका क्षेत्रफल लिखकर समझाइये।
3)कवर्धा में मिट्टी कौन सी पाई जाती है?
4)मिट्टी का स्थानीय नाम।
5)कवर्धा की मुख्य फसल।
6)गन्ने का ही उत्पादन क्यो?
7)कवर्धा के वृष्टि छाया क्षेत्र होने के क्या कारण है?
8)मैकल पर्वत श्रेणी का मानसून पर प्रभाव।
9)छत्तीसगढ़ में औसत वार्षिक वर्षा।
10)स्थल पवन और जल पवन क्या है?
11)दोनों के चलने का समय और मानसून पर प्रभाव
12)दक्षिण पश्चिम मानसून का भारत मे प्रवेश और लौटती हुई मानसून को चित्रवत समझाइये।
13)वाष्पीकरण और संघनन क्या है?
14)बादल निर्माण की प्रक्रिया समझाइये।
15)अम्ल वर्षा क्या है?
16)डोंगरगढ़ से बिलासपुर के मध्य नदी का वर्णन 

⭕सदस्य:-1)लंपी वाइरस क्या है? सरकार के प्रयास।
2)राज्य शासन की फ्लैगशिप योजनाएं
3)राजीव गांधी किसान न्याय योजना की प्रासंगिकता।
4)क्रयशक्ति क्षमता क्या है?
5)आपदा प्रबंधन क्या है?
6)परिस्थिति आधारित प्रश्न:-किसी क्षेत्र में रात्रि काल मे बाढ़ की स्थिति होने पर आपका क्या प्रतिक्रिया एवं निर्णय होंगे? 

⭕सदस्य:-1)यूरोप महाद्वीप को पूर्व,मध्य और पश्चिमी क्षेत्र में विभाजित कीजिये।
2)रूस मुख्यतः किसी महाद्वीप में शामिल है?
3)अफ्रीका महाद्वीप के 5 देश एवं उनकी राजधानी
4)दक्षिणी अमेरिका के 5 देश व उनकी राजधानी
5)अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष का मुख्यालय एवं उनके कार्य
6)IMF का ब्रिटेन की वित्तीय संकट में भूमिका।
7)NATO क्या है,उसका पूरा नाम एवं सदस्य संख्या
8)रूस-यूक्रेन संकट में नाटो(NATO) की भूमिका।

Wednesday, September 14, 2022

कार्यालयीन प्रशिक्षण अनुभव

              ★फीडबैक★

विषय:-कार्यालय,क्षेत्रीय उपसंचालक,छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा,दुर्ग की ओर से विभाग एवं कार्यालय के क्रियाकलाप संबंधी जानकारी हेतु दिनांक 07/09/22 से 09/09/22 तक त्रिदिवसीय प्रशिक्षण सत्र पर प्रतिविचार बाबत।

प्रथम दिवस:-दिनाँक 07/09/22 को ज्येष्ठ संपरिक्षक मैम श्रीमती सरला साहू एवं सुश्री मिथिलेश्वरी शर्मा जी के द्वारा प्रातः 11 बजे से छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा प्रक्रिया एवं स्थानीय निकाय के संबंध में प्राथमिक परिचय दिया गया। जिससे हमें अपने कार्यालय के द्वारा किये जा रहे अंकेक्षण कार्य हेतु निकाय संबंधी जानकारी प्राप्त हुए। सबसे महत्वपूर्ण यह रहा,कि हमे हमारे विभाग का पूर्व नाम "स्थानीय निधि संपरीक्षा" का नामनुरूप जानकारी एवं वर्तमान नाम रखने संबंधी प्रासंगिकता समझ मे आयी।
             द्वितीय सत्र श्रीमती गुपेश्वरी मैडम जी का रहा,यह सत्र मेरे लिए अति महत्वपूर्ण रहा,क्योकि इस कार्यालय संबंधी वास्तविकता एवं यथार्थ से परिचय मैंम से प्रात्यक्षिकता के फलस्वरूप ही प्राप्त हुआ। जिस तारतम्य में अंकेक्षित निकाय में किये अंकेक्षण कार्य के फलस्वरूप हमारे द्वारा अपनायी जाने वाली प्रतिवेदन की प्रक्रिया को बड़े ही सहज एवं सरल भाषा शैली में व्यक्तिगत अनुभव के माध्यम से समझाया गया। प्रतिवेदनों का निकाय से संचालनालय तक पहुचने की स्तरबद्ध जानकारी उल्लेखनीय रही। तथा प्रतिवेदनों का विधान सभा पटल मे रखने की प्रक्रिया समझाकर एवं वार्षिक प्रतिवेदन को हमारे समक्ष प्रस्तुत किया गया।


द्वितीय दिवस:-दिनाँक 08/09/22 का प्रथम सत्र श्रीमती अरुणा पवार जी तथा एवं श्री दीनबंधु चतुर्वेदी सर का रहा,लेकिन किसी कारणवश श्री चतुर्वेदी सर की अनुपस्थिति में उस सत्र का संचालन श्री होमन कुमार ठाकुर सर के द्वारा किया गया,जिसमें "ऑडिट ऑनलाइन" विषय पर कंप्यूटर के माध्यम से प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया गया,विषय का नया स्वरूप एवं तकनीक आधरित होने के कारण उक्त विषय पूर्णरूपेण समझ नही आया लेकिन विषय के प्रति समझ पैदा हुई।
         आगे अरुणा मैम के द्वारा संपरीक्षा अधिनियम,1973 का वाचन करते हुए,उसके सैद्धान्तिक स्वरूप से अवगत कराया गया।
                  
              द्वितीय सत्र श्री अतुल कुमार अग्रवाल एवं श्रीमती रामेश्वरी मैम के द्वारा लिया गया। अग्रवाल सर का द्विदिशीय वार्तालाप एवं प्रश्नोत्तर शैली,विषय के समझ हेतु मन को सहज ही आकर्षित करता है और साथ ही रामेश्वरी मैम का समझाने के प्रति उत्सुखता।
             श्री अग्रवाल सर के द्वारा हमारे अब तक के कार्यालयीन समझ का आंकलन कर गबन,अंकेक्षण शुल्क एवं मासिक माहिती की जानकारियां प्रदान किया गया।जिसमें रामेश्वरी मैम के द्वारा भी निकायों के उक्त विषय संबंधी परिचय कराया गया।

तृतीय दिवस:-दिनाँक 09/09/22 को श्री दिनेश कुमार सर के द्वारा बजट,स्थापना,वेतन निर्धारण एवं अधिभार संबंधी समस्त जानकारी सह अधिनियम प्रदान किया गया। श्री सर जी का प्रशिक्षण सत्र के साथ उनकी उपस्थिति इस कार्यालय में एक अभिभावक की भूमिका को पूरा करता है। सर के द्वारा प्रदत्त वेतन निर्धारण एवं अवकाश संबंधी जानकारी अत्यधिक आकर्षित करने वाला था।
                 

" VIP दर्शन व्यवस्था "

मंदिर की परिकल्पना ऐसे स्थल के रूप में सर्वविदित है, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति,जो उस पद्धति पर विश्वास रखता है, निर्बाध रूप से अपनी उपासना कर सक...