Monday, December 9, 2019

हैदराबाद गैंगरेप:पुलिसिया एनकाउंटर

जैसा की आप सभी को ज्ञात है,कि हैदराबाद में बीते कुछ दिनों पहले की रात में वहां की एक महिला पशु चिकित्सक का कुछ युवकों द्वारा रात्रिकाल में सहायता देने के बहाने उसका दुष्कर्म किया गया एवं उनकी हत्या कर उनके शव को NH-44 में एक नाले के नीचे जला दिया गया। घटना की निर्ममता को देखते हुए पूरा देश आक्रोशित हो उठा और सर्वत्र लोगो द्वारा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष(सामाजिक माध्यम/social sites) रूप से पीड़िता दिशा के समर्थन में आरोपियों को पकड़े जाने के बाद उनकी सख्त न्यायिक प्रक्रिया तहत शीघ्रातिशीघ्र फांसी की मांग की जाने लगी।।

पकड़े गए चारो आरोपी तेलंगाना पुलिस के हिरासत में थे,तेलंगाना पुलिस 6 दिसंबर प्रातःकाल आरोपियों के अपराध किए जाने की तरीका समझने हेतु(रीक्रिएट सीन) घटना स्थल पर ले गई। उसके बाद की खबर सभी को चौंका देने वाली तथा देश के माहौल को उत्साहित कर देने वाली रही,चारो आरोपियों को पुलिस के द्वारा उनके ही पिस्टल को लूटकर भागने और गोलीबारी के आरोप में स्वयं के बचाव हेतु एनकाउंटर किए जाने की बात कहा गया।।

अब प्रश्न यह उठता है, कि

•क्या यह एनकाउंटर सही है या नहीं?

इस संबंध में तेलंगाना सरकार ने पुलिस आयुक्त महेश एम भागवत की अध्यक्षता में एक SIT गठित की है,जो इसकी सत्यता की पुष्टि करेगी।।

•क्या लोगो के द्वारा इस घटना को न्याय के रूप में पेश किया जाना सही है?

भारतीय संविधान और कानून को बने हुए लगभग 70 वर्ष हो गए है,और यही जनमानस जो पिछले 70 वर्षों से इस कानून का परिपालन करते रहे है। वो ही आज कानून से हटकर हुए इस एनकाउंटर रूपी न्याय को "श्रेष्ठ न्याय" की संज्ञा से विभूषित कर रहे है।
                             इसका मुख्य कारण है,हमारी न्यायिक प्रक्रिया में विलंबता का होना,जिसका जिक्र स्वयं वर्तमान CJI श्री एस ए बोबडे जी ने जोधपुर उच्च न्यायालय के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण समारोह में किया। और जनमानस की सब्र रूपी बांध इन 70 वर्षों में पूर्णतः लबालब होकर टूटने लगा है,यदि समय रहते इस पर सुधार हेतु समीक्षा ना किया जाए और न्यायिक प्रक्रिया को तीव्रता से संचालित ना किया जाए तो जनता का विधिक न्याय से विश्वास पूर्णतः खत्म हो जाएगा।।

•तो क्या लोगो के द्वारा सजा अथवा चौराहों पर फांसी(तात्कालिक न्याय) उचित है?

शासन चाहे राजतांत्रिक हो या लोकतांत्रिक, उसके सफल संचलन हेतु विधि की आवश्यकता होती है। तो निश्चित ही इस विषय पर मेरा व्यक्तिगत राय यही है,कि उन चारो आरोपियों को सजा यदि न्यायिक प्रक्रिया से मिलता तो यह स्वागत योग्य फैसला रहता। जनता के हाथों में न्याय आने से आंतरिक व्यवस्था चरमरा जाएगी। जनता इससे और अधिक प्रताड़ित तथा स्वयं हिंसकता की ओर अग्रेषित होंगे। 
                  निरपेक्षतः लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही न्याय जनमानस के हित में होगा।।

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