" छत्तीसगढ़िया,सबले बढ़िया "
उर्ध्वलिखित पंक्ति,जो छत्तीसगढ़वासियों के लिए स्वयं पर गर्व भाव को जागृत करने की पंक्ति है,की वर्तमान प्रासंगिकता किस स्तर की है.....??
क्या यह केवल नारा मात्र है......??
यह अपने में कौन-कौन से भाव को अन्तरग्रहीत किया हुआ है.....??
निःसंदेह स्वयं के किसी क्षेत्रविशेष से सम्बद्धता को लेकर व्यक्ति के मन मे गर्व का भाव होना सहज है......यह आपकी विशिष्टता के लिए भी आवश्यक है......उस क्षेत्र विशेष का नाम आपके व्यक्तित्व के आधार पर ख्यातिप्राप्त करें,इस हेतु भी महत्वपूर्ण है.........
उपर्युक्त बातो के इतर जब हम उस पंक्ति का उपयोग स्वयं की श्रेष्ठता के लिए करते है,तो क्या हम उसे समझ भी पाते है......कि क्या इस पंक्ति को कह देना बस ही,हमारे छत्तीसगढ़ के प्रति कृतज्ञता को व्यक्त करता है......??
प्रथमतः इस हेतु हमे इनके भाव को ग्रहण करते हुए,अपने में ऐसी क्षमता विकसित करना है,कि हम जिस क्षेत्र में हो,चाहे वह व्यापार-वाणिज्य,शिक्षा,कला,क्रीड़ा(खेल) आदि,उस क्षेत्र विशेष में नेतृवकर्ता रहें। जो लोगो के बीच मिसाल के रूप में पेश हो.......
द्वितीय: इस पंक्ति का प्रयोग करने का उद्देश्य,कदापि यह नही होना चाहिए,कि हम इससे दुसरो की निकृष्टता को सिद्ध करें.......शांतिप्रिय सहअस्तित्व की भावना हमारे संस्कृति का मूलाधार है......हमे सभी वर्गों,परंपराओं, संस्कृतियों के साथ "संगच्छद्वम् संवद्धवम्" के भाव से एकाकार होना चाहिए......ऐसे भाव ही पंक्ति की सार्थकता को सिद्ध करेगा......
तृतीय: हमारा प्रयास ही इस स्तर का हो,कि यह पंक्ति अपनी सार्वभौमिकता को प्राप्त करने की ओर अग्रसर हो.......यह अत्यंत प्रभावी तब होगा,जब इसे हमारे स्थान पर अन्य के द्वारा प्रयोग किया जाएगा.......जैसे कि व्यापार के क्षेत्र में गुजरात जैसे राज्य की स्थिति को हम सभी स्वीकार करते है......संस्कृति संरक्षण के मामले में दक्षिण भारत की स्थिति को स्वीकार करते है.......कुछ इसी तरह हमे अपनी क्षमता,स्वभाव से इस ओर प्रयास की आवश्यकता है.....
लेकिन दुविधा यह है,कि जो व्यक्ति इस पंक्ति को प्रयोग करता है,वह ही बड़े-बड़े मंचों,स्थानों या छत्तीसगढ़ से परे अन्य क्षेत्र में इसका प्रयोग करने से स्वयं को पृथक रखते है,उनमे छत्तीसगढ़ संस्कृति से स्वयं की सम्बद्धता प्रदर्शित करना हीनता का भाव पैदा करता है.......ऐसी वृत्ति का त्याग अत्यावश्यक है......इस हेतु हमे मराठा संस्कृति से सीख लेना चाहिए.......
इन्ही कुछ विचारो के साथ आप सभी को छत्तीसगढ़ निर्माण दिवस(राज्योत्सव) की अनेकानेक,गाड़ा-गाड़ा एवं असीमित शुभकामनाएं.......प्रयास करें हम सभी समृद्ध एवं नैतिक छत्तीसगढ़ निर्माण हेतु सतत प्रयत्नरत रहे.........
आपका......😊
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