Wednesday, November 9, 2022

"कार्यक्षेत्र में प्रथम दिवस के लिए यात्रा और उसका अनुभव"



आज के दिवस का प्रारम्भ प्रातः काल मे 4:30 में हुआ। ये रहा अपने निज निवास पंडरिया से अपने कार्यक्षेत्र में गमन करने के लिए तैयारी का क्रम। कड़ाके के ठंड के दरमियाँ पूर्वाह्न 5:15 में पंडरिया से दुर्ग के छूटने वाली बस के लिए तैयार होकर सहशरीर 5:15 को पहुँचा ही था,कि बस 100 मीटर आगे निकल चुकी थी। ये एक संयोग मात्र ही था,कि बस के कंडक्टर के द्वारा वहाँ से बाइक में आगे बस में बैठने के लिए जाया जा रहा था। उन्होंने किसी चित-परिचित की भाँति मेरे मन की व्यथा को समझते हुए,मुझे अपने ही बाइक में बिना किसी ऐसे भाव के (मेरे बाइक में 3 लोग कैसे बैठेंगे) निःसंकोच बैठने के लिए कहा और बस में बैठाने/पकड़ाने में उनकी   महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह भी हो सकता है,कि वे अपने आर्थिक लाभ की दृष्टि से हमारी मदद किये,हो लेकिन जिस नेक उद्देश्य हेतु घर से पूजनीय माता-पिता जी के द्वारा मेरा विदा किया गया था। उस हेतु तो वे अतिधान्यवाद के पात्र है,अन्यथा वह उद्देश्य धरा का धरा रह जाता।

पूर्वाह्न 5:15 से चलने वाली बस का दुर्ग में 10:25 को पहुँचने में लगने वाला समय लगभग 5 घण्टा,10 मिनट का सफर का अधिकांश भाग शीतलहर से प्रभावित रहा और उससे बचते-बचते गर्मवस्त्र के आगोश में सोते हुए व्यतीत हुआ।

दुर्ग पहुँचने के पश्चात स्थानीय निज निवास पहुँचकर निजी वाहन से आदरणीय एवं सम्माननीय श्री गूगल मैप के माध्यम से सहायता प्राप्त करते हुए,वर्तमान में कार्यमुक्ति के पश्चात प्राप्त हुआ प्रथम निकाय "जनपद पंचायत,पाटन" में बड़े धूलधक्कड़ का सामना करते हुए पहुँचा।

पाटन का सम्बंध वर्तमान में हमारे राज्य के आदरणीय मुख्यमंत्री जी के गृहक्षेत्र से होने के कारण, इसकी छवि जिस प्रकार से मेरे मनमस्तिष्क में घर की हुई थी,उसको गहरा आघात पहुँचा। इस आघात का कारण यह रहा,कि मध्य मार्ग में पथनिर्माण कार्य के कारण हमे हुए परेशानी........धूल का गुबार ऐसा रहा,कि घर से बिना किसी मेकअप(साज-श्रृंगार) के मेकअप का आनंद प्राप्त हो गया।

जनपद पंचायत पाटन में पहुँचने पर क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग के द्वारा निर्धारित कार्यक्रमानुसार ज्येष्ठ संपरीक्षक आदरणीय श्री कमलेश कुमार सोनवानी के द्वारा मुझे इस कार्यालय से परिचित कराया गया। इस पल ही मन मे संकोच था,कि पहला दिवस में कफ्यले से सामंजस्य किस प्रकार बनाना है,लेकिन कुछ ही क्षण में सभी से परिचय पश्चात मैं स्वयं को अत्यंत सहज स्थिति में पाया,कि मैं अपने दुर्ग के ही कार्यालय में हूँ।

इसी क्रम में मेरे द्वारा अपने ज्येष्ठ अधिकारी जी को उपस्थिति पत्र प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात कार्य प्रशिक्षण का सत्र श्री सर के द्वारा लिया गया। प्रथम दिवस के मद्देनज़र ओझल की स्थिति से बचने के लिए तत्संबंधी सामान्य जानकारी ही प्रदान किया गया। जो मेरे लिए बिल्कुल ही नवीन था,यह एक विशेष अनुभव दिलाने वाला था। जो इस प्रकार था,जैसे कक्षा छठवी के बच्चे को संस्कृत सिखाया जा रहा है। कुछ चीजें हिंदी और संस्कृत में समरूपता के कारण जो समझ आता है,वैसे ही समझ आ रहे थे। तो कुछ ज्ञान लट्टलकार/लृट्टलकार की भाँति अत्यंत नवीन थे।


कुल मिलाकर यह दिवस एक जिज्ञाषु छात्र के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा। जो जीवन के विशेष स्मरण के रूप में मनमस्तिष्क में अंकित हुआ।



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