सनातन संस्कृति के औचित्यपुरक,गौरव और गरिमा के आधारस्तंभ प्रभु श्री राम जी के द्वारा अन्याय रूपी लंका,अधर्म और असुरता के पुर(गढ़) का दमन कर निज धाम आगमन के अवसर पर नगर/ग्रामवासियों द्वारा सम्पूर्ण क्षेत्र को तात्कालिक प्रकाशिक माध्यम(दीप) से अत्यंत हर्षोल्लास एवं प्रसन्न भाव से आलोकित कर दिया गया........
तब से(सतयुग) लेकर आज तक जनमानस के द्वारा प्रभु के आगमन के स्मृति स्वरूप दीप को अवली अर्थात कतार(पंक्ति) में प्रज्वलित किया जाता है.........इस प्रकार दीपावली का ये पावन पर्व........स्वयं में अनंत ज्ञान,संदेश,प्रेरणा एवं आदर्श को समाहित किये हुए भारत मे ही अपितु सम्पूर्ण वैश्विक पटल मनाई जाती है.......
लेकिन इस हर्षोल्लास और उत्सव के मध्य कुछ वर्गों की यह वृत्ति......जनमानस की भावना को आघात पहुचाती है.....जो है इस समयकाल में उत्सव संबंधी ज्ञान के प्रसारण की है.......
तत्समय में ही एक बड़े ब्रॉडकास्टिंग एजेंसी (xyz) के द्वारा दीपावली को स्मृति पर कुछ इस प्रकार लाया गया,कि महिलाओं का इस पर्व के आयोजन के साथ ही शोषण का क्रम चलते आया है.......
यह कोई एक दृष्टांत नही है,जिससे हमारी भावनाएँ आहत होती हो......इस क्रम में चली आ रही ज्ञान प्रदाय की वृत्ति में वर्तमान समायानुक्रम में कुछ अल्पता दृष्टिगत होती है,लेकिन वृत्ति तो व्याप्त है ही............जो प्रदूषण,अतिव्ययन आदि अनेक संदर्भो पर प्रदान की जाती रही है और जाती है......
उन सभी को इस तथ्य से अवगत कारण चाहूंगा,कि हममे बौद्धिक एवं तार्किक क्षमता इतनी तो विकसित है,कि हम अपने निर्णयन में सक्षम है.....उचित क्या और अनुचित क्या?........विश्वास की सीमा क्या होगी........??
यदि फटाखा फोड़ने(प्रदूषण सम्बन्धी) के लिए ज्ञान दीपावली सम्मत हो,तो निश्चित ही मैं फटाखा फोड़ने का पक्षधर रहूँगा........ इसका अर्थ यह नही हुआ,कि मैं स्वयं फटाखा प्रस्फुटित करता हूँ........हमारी दीपावली में तो हमारे द्वारा एक भी फटाखा प्रस्फुटित नही किया जाता है.........लेकिन संदर्भवश मुझे सीमा बदलनी पड़ेगी.......इसमें मैं किंचित(तनिक भर) संशय में नही हूँ
ज्ञान एक ऐसा धन है,जिसके प्राप्ति पर किसी भी प्रकार का संकोच व्यक्ति के हित के विपरीत है........जिसका प्राप्त होना ही वरदान है......वह भी स्वत: प्राप्त होना तो फिर ईश्वरीय कृपा है........आलोचनात्मक ज्ञान हितकारी भी होता है.......उसे भी सहर्ष स्वीकार किया जा सकता है......
लेकिन आलोचना एक विशेष प्रयोजन(समक्ष को नत भाव) से हो यह स्वीकार नही.......इस प्रयोजन पर चर्चा विस्तृत है.......जिसे हम आगे करेंगे.....
आज के लिए आप सभी को अंधकार रूपी अहंकार हो ज्ञान रूपी आलोक के माध्यम से विलोपित और समूल नाश करने का संदेश देने वाले पर्व दीपावली की अनंत एवं असीमित शुभकामनाएं......... आप सभी पर प्रभु श्री राम जी एवं माँ लक्ष्मी जी की आशीर्वाद आच्छादित हो/प्राप्त हो.......आपका जीवन आनंदमय हो ऐसी कामना है हमारी........
इन्ही विचारो के साथ आपका......😊
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